ICE CREAM BANANE KA BUSINESS KAISE KAREN.PART-2

                     

 ICE CREAM BANANE KA BUSINESS KAISE KAREN.PART-1 YAHAN PADHE..

 प्रक्रिया का प्रथम चरण फ्रीजिंग (Freezing)-

चाशनी तो प्राय: इकट्ठी तैयार करके ही रख ली जाती है।सामान्य आइसक्रीमो की चाशनी में प्रति किलो ग्राम चीनी स्वाद के अनुसार सात से पन्द्रह ग्राम तक साइट्रिक एसिड भी चाशनी पकाते समय ही मिला लिया जाता है । परंतु दुग्ध पाउडर कारण प्रयोग की जाने वाली आइसक्रीमो की चाशनी सादा ही बनाईं जाती है।अण्डो की सफेदी के पाउडर, जिलेटिन तथा अन्य सूखे रसायनों को भी सामान्य पानी में घोलकर अलग-अलग रख लेते हैं। रंग और सुगंध आ दि को चाशनी थेमें मिलाकर उसमें सभी घोल और आवश्यकता अनुसार पानी डालकर मिश्रण तैयार कर लिया जाता है।परन्तु इस मिश्रण को सीधा ही सांचों में नहीं भरा जाता, बल्कि पहले बैच फ्रीजर में अधूरे रूप में जमाया जाता है। भारतीय कुल्फी और दुग्ध आधारित आइसक्रीमो तथा फलों के स्वाद और सुगंध वाली आइसक्रीमो तथा बर्फ की सामान्य सिल्ली के गठन तथा घनत्व में जो भी अंतर होता है उसका आधार जमाने के पूर्व की जाने वाली फ्रीजिंग की यह प्रक्रिया ही है। यदि मिश्रण तैयार करने के पश्चात उसको सीधा ही सांचों में भरकर जमा लिया जाएगा​,तब तैयार होने वाली आइसक्रीमे भारी और सख्त तो होगी ही, मिश्रण भी लगभग दुगना लगेगा। यही कारण है कि आइसक्रीमो को सांचों और कपो में डाल कर पूरी तरह जमाने से पहले बैच फ्रीजर में अधूरे रूप में जमाया जाता है। बैच फ्रीजर में वाटर बाथ की तरह ड्रम की आकृति के दो पात्र लगे होते हैं और उन दोनों के मध्य होता है रिक्त स्थान। सामान्यतः ऊपर का ड्रम ढलवां लोहे का होता है और अंदर का मिश्रण भरने का पात्र स्टेनलेस स्टील अथवा एल्यूमिनियम की गोल टंकी के रुप में होता है। इस पात्र के अंदर इस प्रकार की व्यवस्था होती है कि इस का ढक्कन बंद कर दिये जाने पर इसके अन्दर लगा बिशेष आकृति का मिक्सर लगातार घूमता रहे। फ्रीजर के अंदर मिक्सर की तरह घूमने वाली जो यंत्र लगी होती है उसे स्क्रेपर (Scrapes) अर्थात खुरचने वाला कहा जाता है। इस स्क्रेपर की बनावट इस प्रकार की होती है कि इसमें लगीं छडे फ्रीजर के गोल टंकी के निचले हिस्से के ऊपर तक परिधि से छूती हुई रहती है ।जब स्क्रेपर घूमता है तो पात्र की दीवारों पर जमने वाली बर्फ की परत को खुरचकर मिश्रण में गिराते हुए उसे फेंटता भी रहता है।इस प्रकार मिश्रण जमने के साथ-साथ लगातार फिटता भी रहता है और अधूरे रूप में जमने तक फूलकर दुगना तक हो जाता है । इस​बैच फ्रीजर में नीचे की ओर एक​नली होती है जिसमें अमोनिया गैस भरकर धीरे धीरे इस का तापमान घटाते हैं और अंतिम चरण में शून्य डिग्री फारेनहाइट (0°F) पर लगातार स्थिर रखते हैं। यद्यपि अमोनिया गैस के स्थान पर फ्रीजर के दोनों पात्रों के मध्य कुटी हुई बर्फ और नमक भरकर भी यह कार्य किया जा सकता है, परंतु समय तो दुगना लगेगा ही, नमक और बर्फ पर खर्च भी कई गुना अधिक पड़ेगा। यही कारण है कि अब छोटे-छोटे उत्पादक भी अमोनिया गैस अथवा तरल अमोनिया का ही प्रयोग करते हैं।

  तीलियों पर मिश्रण जमाना(Final Processing)-- 

फ्री जर से निकलते समय मिश्रण जमकर हलुए की तरह गाढ़ा और फूल कर दोगुना हो चुका होता है।शहद की तरह गाढ़े इस मिश्रण को निश्चित माप की चम्मचों से कपो और सांचों में डाला जाता है।फ्रीजर से निकालने के बाद यह​ अधूरा जमा हुआ मिश्रण पिघलने भी लगता है,अंत: तत्काल ही प्रारंभ कर दी जाती है सांचों में यह आधी अधूरी जमी हुई आइसक्रीम भरने की प्रक्रिया। प्रत्येक आइसक्रीम में एक सीक भी लगी होती है,अंत: इसी समय लकड़ी की एक एक डंडी भी प्रत्येक सांचे में लगाई जाती है। इस डंडी को सेट करने से पूर्व एकाध बार मिश्रण को हिला दिया जाता है, जिससे फालतू हवा निकल जाए। सतह पर धब्बों और गड्ढों से युक्त आइसक्रीम कोई पसंद नहीं करता, अत: अधिक कठोर रुप से जमा हुआ मिश्रण तो आप सांचों में भर ही नहीं सकते मिश्रण भरने के बाद इसे मिलाना भी आवश्यक है वैसे यह कोई विशिष्ट तकनीकी कार्य नहीं है, श्रम पर आधारित एक ऐसा काम है जिसमें दो चार दिन के अभ्यास से ही पूर्ण दक्षता प्राप्त हो जाती है। फलों के स्वाद और सुगंध वाली आइसक्रीमे तो सीको पर जमाई जाती हैं, परंतु दूध पर आधारित आइसक्रीमे कपों में भी जमाई जाती हैं और ब्रिक्स के रूप में भी । बैच फ्रीजर में इनका मिश्रण कुछ सख्त होने​तक तो जमाया ही जाता है, कपों और सांचों में भरने के बाद इन्हें जमने के लिए रखा भी डीप फ्रीजर में जाता है। जिन कपों में एक ही रंग और सुगंध की आइसक्रीम होती है, उनके लिए तो कपों में मिश्रण भर कर सीधा ही फ्रीजर में रख कर जमा लिया जाता है। परंतु एक ही कप में कई रंग और सुगंध की आइसक्रीमें रखने के लिए पहले तो मिश्रण को ब्रिक्स के रूप में जमाते हैं, और फिर विशिष्ट चम्मच से काटकर उन्हें कपों में रखते है। इसके अलावा चाकबार जैसी आइसक्रीमे तैयार करने के लिए सीटों पर पहले तो वनीला आइसक्रीम जमाई जाती हैं और फिर जमीं हुए स्टिक को पतले चाकलेट पेस्ट में डुबो कर निकाल लिया जाता है तथा पैकेजिंग कर लिया जाता है। यह एक ऐसा काम है जिसमें आप के द्वारा बनाई जाने वाली आइसक्रीमो की किस्में, उनकी क्वालिटी और बिक्री मूल्य ही नहीं, आप की कुल बिक्री और लाभ प्रतिशत तक आपके प्लांट और पूंजी निवेश से उतना प्रभावित नहीं होता जितना उस क्षेत्र पर निर्भर करता है जहां आप फैक्ट्री लगा रहे हैं। यही कारण है कि नगरों के मध्य में और पाश कालोनियों के आसपास ही यह उद्योग लगाना सर्वाधिक लाभ प्रद सिद्ध होता है पाश कालोनियों में महंगी और अच्छी आइसक्रीमे तो अधिक मात्रा में बिकती ही हैं, जाड़े में भी इतनी बिक्री तो होती ही रहती है कि आपका उद्योग आसानी से चलता रहें।इसके अलावा कस्बों और छोटे नगरों के लिए आज भी यह उद्योग एक सीजनल​ व्यवसाय ही है, परंतु इतना अधिक शुद्ध लाभ हैं इस व्यवसाय में कि गर्मियों के चार महीने में ही वर्ष भर का खर्च ही नहीं, प्लांट की पूरी नहीं तो कम से कम आधी लागत तो निकल ही आएगा ।

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Bajrangilal

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