ऐसे मां बाप जो अपने बच्चों को असफलता के खाई में धकेल देते हैं

  • जो मां बाप अपने बच्चों का साथ नहीं देते हैं और दूसरों की की गई गलतियों के लिए अपने बच्चों को दोषी ठहराते हैं बिना मुख्य कारण जानें बच्चों को पीट देते हैं जैसे पड़ोसी के कहने मात्र से कि आपका बच्चा गलत है उसे पीट देना बच्चों से एक भी बार उनकी बात सुने बिना इसे बच्चों के बाल मन में एक प्रकार की इमेज बन जाती है कि उसने वास्तव में गलती की है तभी वह पीटा गया ऐसी घटना लगातार बच्चों के साथ होने से वह अपराध बोध की स्थिति में आ जाते हैं और वह अकेले रहना चाहते हो उनको ऐसा लगता है कि दुनिया में उसका साथ देने वाला कोई नहीं है और मायूस रहने लगते हैं उनके अंदर एक अजीब सा डर रहने लगता है और वह बच्चा समाज में डरता है और अपने आप को समाज से अलग कर लेता है जो माता पिता अपने बच्चों की बातों को पूरा सुनने के बजाए उसे घुड़कियां देते हैं उसे दूसरों के कहने मात्र से उस गलती के लिए पीते हैं जो उसने की ही ना हो उसे उस खाई में धकेल देते हैं जो उसे जीते जी नरक का आभास करता कराता है और उस बच्चे को डर संकोच और असफलता की डिग्री प्राप्त करने में सहायक है मेरी राय में ऐसे बच्चे अवसाद से पीड़ित होकर आत्महत्या कर लेते तो कोई आश्चर्य की बात नहीं होगी ऐसे मां बाप जो ठीक वैसी ही सजा मिलनी चाहिए जितनी उस चोर को सजा मिलनी चाहिए जिसे उसके मां-बाप ने चोरी करना सिखाया
 कभी अपने बच्चों को उस गलती की सजा दूसरों के कहने पर ना दें जो उसने की ही ना हो।
अपने बच्चों को अपनी बात को रखने का एक मौका अवश्य दें ताकि वह अपने आप को सही साबित कर सकें और अपने आत्मविश्वास तर्क शक्ति को विकसित कर सकें।
अपने बच्चों को ऐसे ह हर बात से दूर रखें जिससे डर अविश्वास अपराधबोध जैसी प्रवृतियां विकसित होती है।
समाज को यह छुट न दें जिससे वह आपके बच्चों को एक नकारात्मक ब्रांड बना दें।
अपने बच्चों की उस हर काम को करने की आजादी दे जो सामाजिक व प्राकृतिक तौर पर सही है और उस काम को करने में आत्म सम्मान विकसित होती है।
जब आपके बच्चे कोई अच्छा काम करके आए तो उनकी खुलकर तारीफ करें।

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Bajrangilal

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