दोस्तों आज खानपान में नियंत्रण ना होने के कारण काफी लोग कब्ज, अपच ,बवासीर की बीमारी से जूझ रहे हैं । यहां पर हम आपको एक ऐसे व्यक्ति के बारे में बताएंगे जो बवासीर का आयुर्वेदिक देहाती इलाज द्वारा अपने परिवार का पालन पोषण तथा लोगों को लाभ पहुंचा रहा है । जहां बवासीर का एलोपैथिक इलाज ऑपरेशन है वही यहां इस व्यक्ति द्वारा दिया गया एक खूराक औषधि रोगी को निरोगी बना देता है । सत्तू चौहान नाम का यह व्यक्ति ग्राम धर्मनगर जिला बलरामपुर उत्तर उत्तर प्रदेश इंडिया का निवासी है । इनका कहना है की दवा इनसे पहले इनके पिता स्वर्गीय श्री महादेव चौहान दिया करते थे। वह यह दवा केवल सप्ताह में 2 दिन मंगलवार तथा रविवार को ही देते हैं । उनका कहना है कि उनके पास भारत के कोने-कोने से लोग इनका दवा खाने आते हैं और लाभ उठाते हैं । बवासीर की औषधि केवल एक खुराक ही खाना होता है तथा निम्नलिखित परहेज करना पड़ता है __
  • दवा खाने के बाद 8 दिनों तक केवल दही चावल या दही रोटी खाना होता है।
  •  8 दिनों तक गुटखा पान मसाला मदिरा आदि चीजों का त्याग करना पड़ता है।
  •  8 दिनों तक चाय काफी व हर चिकनी तेल युक्त चीजों का त्याग करना पड़ता है।
 मैं यह समझता हूं कि ऑपरेशन में एलोपैथिक दवाओं से यह परहेज कहीं अच्छा है। मेरे काफी पूछने पर उन्होंने अपना साधारण सा मगर कीमती फारमुला  मुझे बताया है। यदि आप चाहें तो घर बैठे अपने परिवार वालों को इलाज कर सकते हो परंतु परहेज महत्वपूर्ण है ।


केला और लटजीरा का पत्ता
लटजीरे को कई नामों से जाना जाता है। जैसे  लटजीरा ,चिरचिटा, लहचिचडा आदि। एक केले में २० ग्राम लटजीरा के पत्ते को केले के साथ मरीज को खिला दें । 8 दिनों में ही पुराना से पुराना बवासीर जड़ से खत्म हो जाएगा।
 आप अपना रिजल्ट कमेंट बॉक्स में जरूर लिखें जिससे और लोग भी लोग लाभ उठा सकें यह बिल्कुल आजमाया हुआ फारमुला है। धन्यवाद
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Bajrangilal

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