आइसक्रीम बनाने के व्यापार में सफलता प्राप्त करना बहुत आसान है क्योंकि इस व्यापार में अपनी बनाई आइसक्रीम अपने ठेलों में रखवा कर अपने हाकरो द्वारा बिक्री करवाते हैं ।प्रतिदिन बिक्री नकद होना और बीच में किसी मध्यस्थ का न होना​ इसके दो बड़े लाभ हैं।

 उद्योग का अर्थ शास्त्र-

सभी उपभोक्ता सामग्री उद्योगों​में मुख्य भूमिका कार्य कारी पूंजी की होती है। आप जितना धन संपूर्ण प्लांट की सेटिंग में लगाते हैं उससे भी कई गुना आपकी रकम लगता है पैकिंग मैटेरियल और कच्चे माल की खरीद पर । परंतु इस उद्योग में कार्य कारी पूंजी तो नाम मात्र के लिए चाहिए।प्रारम्भ में आपका जितना धन मशीनों की खरीद और सेटिंग में लगता है, लगभग उतनी ही रकम इन रेहड़ियों के निर्माण में लगजाती है।यही नहीं, रात्रि को रेहडिया खड़ी करने के लिए प्रयाप्त स्थान भी चाहिए ।परन्तु और कोई व्यवस्था आपको नहीं करनी पड़ती। आइसक्रीमे सीको पर जमाई जाती हैं,या फिर कागज अथवा प्लास्टिक के सस्ते कपो में ।कोल्डड्रिंक की बोतलों के बिपरीत ये सीखने और कप आप वापस नहीं लेते,अत़ं न तो पैकिंग मैटेरियल काम हिसाब रखना पड़ता है और न इस मद पर अधिक धन ही व्यय होता है ।सबसे बड़ी बात तो यह है कि आपकी रेहड़ियों में कमीशन पर आइसक्रीमे बेचने वाले हाकर सुबह जो माल लेते हैं उसका हिसाब और पैसे अपको उसी दिन शाम को ही दे देते हैं।यही कारण है कि इस उद्योग में आपका धन उधार में नहीं फंसता, कच्चा माल भी आसानी से खरीदा जा सकता है।इसके बावजूद इतना अधिक शुद्ध मुनाफा है इस उद्योग में कि प्लांट और रेहड़ियों की सम्पूर्ण लागत एक सीजन में न इस उद्योग में पर्याप्त रहता है, परंतु इतना ही स्थान रेहड़ियों को रखने के लिए भी चाहिए।चाशनी पकाने और दूध गर्म करने के लिए भट्ठी तथा तैयार आइसक्रीमे रखने के लिए डीपफ्रीजर तो आपको चाहिए ही, इसके साथ ही मिश्रणो् को रखने अौर बनाने के लिए कुछ टंकियां भी चाहिए।इनके साथ ही मिश्रणो् को घोंटने और जमाने वाला बेंच फ्रीजर तथा आइसक्रीमे जमाने का यूनिट तो इस उद्योग की अनिवार्य और सबसे कीमती मशीनें हैं ही ।वैसे न तो ये मशीनें कुछ जटिल है और न ही अधिक कीमती। वास्तव में ये सभी मशीनें और उपकरण कम्प्रेशर लगे हुए विभिन्न आकारों और क्षमताओं के फ्रीजिंग प्लांट ही हैं । यही कारण है कि दो-ढाई कुंटल आइसक्रीम प्रति शिफ्ट तैयार करने वाले सम्पूर्ण प्लांट पर २ लाख रुपए से अधिक धन नहीं लगता, तो १० लाख रुपए में लग जाता है एक टन क्षमता का पूर्णतया वातानुकूलित प्लांट । जहां तक स्थान के चयन कारण प्रश्न है वह बाजार के जितना निकट हो उतना ही अच्छा है, परंतु भवन का बहुत मजबूत होना अनिवार्य नहीं ।आइसक्रीमे जमाने के लिए ही नहीं, उन्हें रखने तक के लिए अत्यंत ठण्डा स्थान चाहिए।यही कारण है कि टिन शेड में तो यह उद्योग लगाया ही नहीं जा सकता, अधिकांश निर्माता तो पूरे कार्यस्थल और भण्डारगृह को ही एअर कंडीशन करा लेते हैं। वातानुकूलित भवन में जहां तैयार आइसक्रीमे और कच्चे माल के रूप में दूध तथा अण्डे हफ्तों तक सुरक्षित बने रहते हैं, वहीं आइसक्रीमे बनने में भी कम समय लगता है। इस तरह बिना कोई मशीन कर्मचारी बढ़ाए सामान्य की अपेक्षा डेढ़ गुना तक उत्पादन वातानुकूलित प्लांट में आसानी से हो जाता है। अगले पोस्ट में बनाने की विधि व कच्चे माल की सम्पूर्ण जानकारी​ के बारे में पढ़ें।

 कच्चा माल तथा निर्माण प्रक्रिया (Raw material s)-

- आइसक्रीमे मुख्य रूप से दो प्रकार की होती हैं-१-फलो़ के रंग और सुगंध वाली सामान्य सस्ती आइसक्रीमे तथा दूध और क्रीम आदि के मिश्रण से निर्मित वनीला तथा अन्य कीमती आइसक्रीमे। चाकबार वनीला आइसक्रीम पर चाकलेट पेस्ट की सतह चढ़ाकर तैयार की जाती है, तो फर्नेडो और कसाटा आदि आइसक्रीमे गाढ़े दूध​में भरपूर मेवाएं मिलाकर तैयार की जाती हैं।वैसे इनमें भी सामान्यतः दूध के साथ भरपूर मात्रा में मिल्क पाउडर तो मिलाया ही जाता है, शुद्ध चाकलेट के स्थान पर भी को को पाउडर का प्रयोग किया जाता है। इनमें चिकनाई और स्निग्धता बढ़ाने के लिए अण्डे की सफेदी और जिलेटिन का प्रयोग भी अनिवार्य रूप से होता है। साफ सुथरी और गंध रहित सरेस को जिलेटिन कहा जाता है और प्रति किलो ग्राम मिश्रण में मात्र सात-आठ ग्राम इसे मिलाना ही प्रयाप्त रहता है। ताजे अण्डो के स्थान पर प्राय: ही अण्डो की सफेदी के पाउडर को आठ गुना ठण्डे पानी में घोलकर चार घंटे रखने के बाद प्रयोग किया जाता है। दूध पाउडर, अण्डो और जिलेटिन का गंध दबाने के लिए प्रतिकिलोग्राम मिश्रण में एक ग्राम वनीला पेस्ट भी इन सभी आइसक्रीमो में अनिवार्य रथरूप से मिलाया जाता है जबकि क्रीम, मक्खन, चाकलेट और अन्य सुगंधो कारण प्रयोग भी करते ही हैं। फलों के स्वाद और सुगंध वाली सामान्य आइसक्रीमो में किसी फलका रस तो क्या, उनके असली एसेंस तक नहीं मिलाए जाते ,। इन आइसक्रीमो का मुख्य आधार घटक नल का साफ पानी और चीनी की सामान्य चाशनी होता है, तो फलों जैसे खट्टे स्वाद के लिए साइट्रिक एसिड, कृत्रिम खाद्य रंग और रसायनों से निर्मित सुगंध मिश्रण इनके गुणवर्धक रचक. । सभी आइसक्रीमो में प्रति किलो ग्राम मिश्रण एक से सवा सौ ग्राम चीनी का प्रयोग प्रयाप्त होता है।और यही कारण है कि काफी कम होता है इस वर्ग की आइसक्रीमो का लागत मूल्य। इन आइसक्रीमो में भी गाढ़ा पन, चमक, स्निग्धता, और हल्का पन बढ़ाने के लिए प्रतिकिलोग्राम मिश्रण सात मिलीलीटर​ अण्डे की सफेदी का घोल, पांच ग्राम जिलेटिन, और दो ग्राम सोडियम अल्गीनेट नामक रसायन मिलाए जाते हैं।

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ICE CREAM BANANE KA BUSINESS KAISE KAREN.PART-2

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