सामान्य सुगंधित ही नहीं, बालों को काला बनाए रखने वाले और गंज नाशक तेलों तक का निर्माण एक ऐसा सीधा साधा उद्योग है जिसे चंद हजार से लेकर लाखों रुपए के निवेश तक सफलता पूर्वक किया जा सकता है ।चाहते हुए भी आप इस उद्योग में जटिल और कीमती मशीनों का प्रयोग नहीं कर सकते। तीन चार हजार शीशियां तेल प्रतिदिन तैयार करते समय भी मात्र एक बोतल फिलिंग मशीन , एक पिल्फर प्रूफ कैप सीलिंग मशीन और एक पुशपुल टाइप एजीटेटर लेने से ही काम चल जाता है।दस हजार से भी कम में आ जाती हैं ये मशीनें।इनके साथ बोतलों के मुंह पर एल्यूमिनियम काम गिलास चढ़ाने वाली कैपसोल सीलिंग मशीन और लेबलों पर सरेस लगाने वाली लेबल गमिंग मशीन लेने पर बहुत शानदार पैकिंग किया जा सकता है । चार हजार रुपए में आती हैं ये दोनों मशीनें। पचास वर्ग मीटर स्थान में कुल पन्द्रह हजार रुपए की मशीनें और उपकरण लेकर लाखों रुपए प्रतिमाह का व्यवसाय इस उद्योग में किया जा सकता है।
यह एक ऐसा उद्योग है जिसमें हानि तो कभी हो ही नहीं सकती, अधिक प्रतियोगिता भी नहीं।छोटे और नए निर्माताओं के बने हेयर आयल भी उन्ही दरों पर आसानी से भरपूर मात्रा में बिक रहे हैं,, जिस दर पर डाबर और सेवाश्रम जैसे बड़े निर्माताओं के बिकते हैं। इन केश तेलों को मुख्य रूप से दो वर्गों में विभाजित किया जा सकता है_- सामान्य सुगंधित केश तेल तथा विभिन्न जड़ी-बूटियों के अर्क और रसायन मिलाकर तैयार किये गये औषधि गुणों से युक्त हर्बल केश तेल। सामान्य सुगंधित केश तेल तो रिफाइंड खाद्य तेलों के मिश्रण में कृत्रिम सुगंध और तेल में घुलनशील रंग मिला कर ही तैयार कर लिये जाते हैं ।जडी बूटियों से निर्मित तेलों में भी रंग और सुगंध तो मिलायी जाती है, परंतु पहले जड़ी-बूटियों को तेल में डालकर पकाते भी हैं। यह कार्य लोहे की कड़ाहियों में सामान्य भट्ठियों अथवा गैस के चूल्हे पर किया जाता है और सामान्य श्रमिक ही कर लेते हैं सभी कार्य। अपने लागत मूल्य से दो गुना तक थोक दर पर इसके निर्माता इन्हें आसानी से बेच रहे हैं, क्योंकि दिन-प्रतिदिन तेजी से बढ़ती ही जा रही है विशिष्ट गुणों से युक्त इन मेडिकेटेड और हर्बल केश तेलों की मांग।

तेलों का चयन एवं मिश्रण (Oil Compounding)--

तेलों का लागत मूल्य और बालों पर इसके प्रभाव का सबसे बड़ा कारक है वह तेल जो इसके निर्माण में आप प्रयोग कर रहे हैं। नारियल का तेल सर्व श्रेष्ठ है, परंतु प्रयाप्त महंगा है और सर्दियों में जम भी जाता है। सबसे ज्यादा प्रयोग धुली तिल्ली के तेल का होता है। यहां विशेष ध्यान रखने की बात यह है कि धोकर छिलका उतारे हुए सफेद तिल के तेल का ही प्रयोग करें। बिना धुले काले तिलों का तेल अधिक गाढ़ा और रंग में पीला तो होता ही है, इसकी तासीर भी गर्म होती है। मूंगफली का तेल काफी सस्ता है, पर इसकी भी तासीर गर्म होती है, साथ ही बालों को काफी नुकसान भी पहुंचाता है। अरण्डी का तेल काफी सस्ता है और बालों को भी कोई नुकसान नहीं पहुंचाता, यही कारण है कि आजकल सबसे अधिक प्रयोग रिफाइंड अरण्डी के तेल का ही होता है । बादाम और काहूकददू के तेल बहुत ही उत्तम औषधीय गुणों से युक्त तेलों में कुछ मात्रा में मिलाए जाते हैं ।अपने तेलों में व्हाइट आयल नामक रंग और सुगंध हीन मिट्टी का तेल कभी न मिलाएं , यह एक नैतिक एवं कानूनी अपराध है।
गुणवत्ता की दृष्टि से नारियल धुले हुए तिल और अरण्डी के तेलों के मिश्रण का प्रयोग ही सर्व श्रेष्ठ रहता है। कुछ आयुर्वेदिक तेलों में पीली सरसों के तेल भी मिलाया जाता है, जो काफी ठंडक प्रदायक है। परंतु मूंगफली का तेल और व्हाइट आयल कभी​ न मिलाएं क्योंकि सिर को खुश्की पहुंचाने और बालों को असमय सफेद करने के साथ ही बालों के झड़ने का भी एक बड़ा कारक है यह दोनों तेल।

रंग, सुगंध आदि सहयोग रचक (Builders)--

केश तेलों में प्रायः तीन प्रतिशत सुगंध मिश्रण मिलाए जाते हैं, अर्थात प्रति लीटर तेल तीस मिली लीटर सुगंध। रसायनों से निर्मित ये सुगंधे कम्पाउण्ड परफ्यूम कहलाती हैं जो बाजार में बनी बनाई मिल जाती हैं। निर्गंध अल्कोहल में विभिन्न सुगंध प्रदायक रसायन मिला कर ये सुगंधे आप स्वयं भी तैयार कर सकते हैं। सुगंध के अनुरूप ही हरा लाल पीले नारंगी आदि रंग भी इसमें मिलाया जाता है। तेल में घुलनशील ये रंग सूखे पाउडर के रूप में होते हैं।आयल्स कलर्स के नाम से आने वाले इन रसायनों से निर्मित सिन्थेटिक रंगों को प्रायः दस गुने तेल में घोलकर रख लेते हैंऔर फिर आवश्यकता अनुसार प्रयोग करते रहते हैं  । 
हेयर आयल सिर पर लगाने के बाद उसकी महक घण्टो तक आती रहे, इसके लिए सुगंध को स्थायी अर्थात फिक्स बनाने के लिए फिक्सेटिव के रूप में कोई रसायन भी मिलाया जाता है । असली चन्दन के तेल(Sandals Oil) अथवा पेरू बालसम(Peru balsam) का प्रयोग इस कार्य के लिए बहुत अच्छे तेलों में होता है, तो टर्पिन आयल (Turpine Oil) अथवा ओडरोफिक्स (odrofix) नामक रसायन का अधिकांश तेलों में। इसके साथ ही लम्बे समय तक रखने पर भी ये खराब न हो इसके लिए संरक्षक पदार्थ (preservatives) के रूप में प्रति किलो ग्राम तेल में पांच ग्राम बैन्जोइक एसिड (benzoic acid) भी इसमें मिलाते हैं। जो तेल पकाकर बनाए जाते हैं, उनमें पकाते समय असली लोबान डाल देने पर भी वे नहीं सडते । वैसे इस कार्य के लिए सबसे अच्छा रहता है पैराहाइड्रोक्सी बैन्जोइक एसिड के यीस्टर का प्रयोग । ये सभी रसायन सुगंध बिक्रेता ओं के यहां भी मिल जाते हैं ।

जड़ी-बूटियां एवं विशिष्ट रसायन (quality increasers)--

अधिकांश छोटे हेयर आयल निर्माता इस बारे में कुछ जानते तक नहीं और सामान्य सुगंधित केश तेल ही जीवन भर बनाते रहते हैं।हेयर आयल में थोड़ा सा तरल कपूर(camphor Oil) मिला देने पर वह जीवाणु नाशक और डेण्डरफ समाप्त करने वाला बन जाता है। थाइमोल, मेंथॉल और पिपरमिंट मिलाकर इन्हें ठण्डक प्रदायक और गंज व रूसी रोधक बनाया जा सकता है। गंज रोकने और पुनः बाल उगाने वाला तेल यूरोप और अमेरिका में केन्थरडाइन नामक एक विशिष्ट मक्खी के डंकों को तेल में घोलकर मिलाने के बाद तैयार किया जाता है।यह केन्थरडाइन आयल के नाम पर साधारण परफ्यूम्स हेयर आयल से​ दो तीन गुने दर पर बिकता है।इन सभी तेलों में गर्म मसालों की सुगंध और लाल अथवा पीला रंग मिला कर आप आसानी से अपने विशिष्ट उत्पाद का रूप दे सकते हैं।
हमारे देश में तो​आंवले के फलों, ब्राह्मी बूटी और भृंगराज के पत्तों के रस, मुलहठी​, मंजीठ, माके, नीम, बेल और पाचू आदि वृक्षों की सूखी पत्तियों को तेल के साथ पकाकर आयुर्वेदिक औषधिय गुणों से युक्त तेल बनाये जाते हैं। आंवला विटामिन सी की खान है और केशों को काला और स्वस्थ बनाए रखने का सर्वश्रेष्ठ साधन है । ब्राह्मी बूटी बहुत अधिक ठण्डक प्रदायक होती है तो भृंगराज के पत्ते सफ़ेद बालों​ को भी पुनः जड से काला बनाने में समर्थ है​। ये फल, पत्ते और जड़ी-बूटियां ताजे होने पर​ तो इनका रस निकाल लिया जाता हैऔर सूखे होने पर किसी मिट्टी के घड़े में इन्हें प्रयाप्त पानी डालकर रख देते हैं। दो तीन दिन बाद इन्हें उबाल कर रस निकाल लिया जाता है ।रस अथवा इस अर्क को तेल में मिलाकर पूरा पानी उडने तक पकाते हैं और ठण्डा हों जाने पर छानकर रंग तथा सुगंध मिला देते हैं।
केश तेल व ब्रिलियण्टाइन और वेव लोशन (HAIR OILS, BRILLIANT S & WEAVE LOTION] कैसे बनाएं PART-2 YAHAN PADHEN..


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